श्रद्धा वसंत ऋतु सुहाई

प्रणाम दोस्तों मेरा नाम है रचना त्रिपाठी और मैंने इस ब्लॉग को अपने कविताएं तथा मनोव्यथाओं को व्यक्त करने के लिए बनाया है। प्रस्तुत है मेरी कुछ प्रमुख कविताएं :-

१. शीर्षक :-“पीड़ा ही प्रेरणा सर्जक की”

वेदना अनजाने ही आती है

लिए साथ अपने गीत कई ।।

शब्द कुछ अंदर ही घुट रहे हैं

पीड़ा उभरी उपजा आह

श्वासों में उम्मीदें कुछ

शब्द बुन रहीं हैं

शब्द जब जुड़ जायेंगे पीड़ा से

अपने आप ही बन जाएगा गीत

पीड़ा ही प्रेरणा सर्जक की ।।


२. शीर्षक :-“असलियत”

बहुत रोए जानकर असलियत

शायद भरम ही ठीक था

मत मुखौटों को उठाओ अब

जानती हूं कत्ल करने वाला –

ईमान का ; मेरा ही मीत था ।

शिनाख्त पैरवी करूं कैसे ?

अनजाने ही मैंने ना जाने –

कितने अपराधों को शह दिए…….।


३. शीर्षक :-“आधुनिक प्रेम”

रस्मोरिवाज चलते रहेंगे

हम तुम मिलते रहेंगे

शायद कभी एक ना हो सकेंगे ।

वफा ना तुम में ना मुझ में

जिस्म फिर भी मिलते रहेंगे।

तलब हुई तो किया

प्यार वफ़ा का इकरार

वरना एक झटके में छोड़ चले

हो गए कहीं और गिरफ्तार।

हम उनको वह हमको

अपना ना कह सकेंगे

चाहे जितना जता लें प्यार ,

एक दूसरे पर शक ही करेंगे ।


४.शीर्षक :-“मां”

मां ईश्वर की सबसे सुंदर कृति है।

मां दुनिया की सबसे बेहतर अभिव्यक्ति है।

मां ममता से सारी दुनिया चलती है।

मां संसार शिशु की लोरी थपकी है।

मां सृष्टि का नींव आधार है।

बिना मां कहां संसार है?

मां अर्चना वंदना मंत्र जाप है।

मां ईश्वर की छाप है।

मैं नत मां के चरणों में सदा।

उससे बढ़कर दुनिया में कोई ढाल कहां।


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