गजलें

Image credit: Google

१.

क्या-क्या अरमां , क्या-क्या सपने।

आज सबकांच के मानिंद टूट गए ।

बादल आसमां में टिकते कब तक

किस्मत उनकी छाने ,बरसने की ।

खानाबदोशों के पराया घर फिर छूट गए ।

दोष तुम्हें दें क्या ;गलती अपनी

हमारी नरमी कमज़ोरी जानने वाले-

मीत ही पाकर खुला घर लूट गए ।


२.

रिश्तो की थी कुछ ऐसी शर्तें

जिनको हम अपना न सके ।

गैरों को भी बनते देखा दोस्त

हम अपनों से भी निभा ना सके ।

आंसू बहा लिया , जी हल्का हो गया

गम को फिर भी भुला ना सके ।

वक्त ने तराशा , ढल गए हम

दाग चेहरे से अपने मिटा ना सके ।

लिखा कुछ , शायद बन गया कुछ

गीत अपने ही गा ना सके ।

कोशिश की लाखों , सहा कांटो को

चमन अपना महका न सके ।


३.

मुझे छोड़ दो इस दर्द के साथ अकेला

भरम ना दिखाओ अपनेपन का बहुत

तुम भी हो खालिस बातों का रेला

मुझे छोड़ दो इस दर्द के साथ अकेला।।

हर डोर रिश्तो की रेशमी तारों से बनी

जाने कब टूट जाए , रह जाए दिल अकेला

मुझे छोड़ दो इस दर्द के साथ अकेला।।

दर्द दर्द थम जाएगा खुद-ब-खुद आदतन

छोड़ जाएगा नमी सी आंखों में

एक तरफ होंगी वीरानियां

उस तरफ लगा है तमाशाई मेला

मुझे छोड़ दो इस दर्द के साथ अकेला।।


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3 विचार “गजलें&rdquo पर;

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