थोड़ी देर

मां धरती थोड़े देर ही सही

मैं थक गई हूं

अपनी गोद में सुला लो ।

अपनी ममतालु हाथों से

थपकी दे मुझको

गा लोरी सुला दो ।

या फिर सुनाओ – वही कहानी

एक थी परियों की रानी

चंदा के घर में रहती थी ।

सपने में चंदा मामा के घर जाऊं

दूर टिम – टिम करते तारे

आहा ये सपने कितने प्यारे !

सपने आंखों को बहलाते

झूठे ही सही , टूटे मन को सहलाते ।

तो ले चलो ना फिर सपनों के गांव

यादों के पनघट पर;

अपने पीपल बरगद की –

शीतल छांव में

मां मुझे थोड़ी देर सुला लो ।


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5 विचार “थोड़ी देर&rdquo पर;

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