पी कहां – पी कहां

प्राण पपीहा पूछ रहा है

पी कहां – पी कहां . . . .

अतृप्ति , बेचैनी , जिजीविषा बलवती फिर भी

हर रोज मांगना

प्यास फिर भी ,

घन आए लाए नेह जल

किंतु नहीं मिटती प्यास अमर ।

पी – पी कर भी

प्राण पपीहा टेरता रहता

पी कहां – पी कहां ।।


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श्रेणी:Uncategorized

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