भरम ही भरम

हम नाहक ही सबको अपना समझते रहे

छोटी सी मुट्ठी में जहां नहीं समाता।

चांद दूर ही रहे तो सही

पास जाकर कहीं टूट न जाए

उसकी सुन्दरता का भरम।

कभी भरम को भी ढोओ ,

शायद सच का सामना

करने की हिम्मत न हो।

कायर हम सब हैं ।

कायरता में भी साहस का भरम।

जहां देखती हूं पाती हूं भरम ही भरम।


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