एक औरत होने के मायने

यह मेरी व्यक्तिगत राय हो सकती है क्योंकि औरतों के हक की लड़ाई में महापुरुषों का ही सर्वप्रथम योगदान रहा। उन्होंने स्त्रियों को उनकी गरिमा और अपने अस्तित्व की रक्षा करने को सदैव उद्यत किया। भारत में स्त्री को पुरुषों से पहले रखा जाता था किन्तु आक्रान्ताओं ने हमें अपसंस्कृति के जाल में ऐसा उलझाया की हम अपना मूल स्वरूप ही भूल बैठे ! आज औरत होने के मायने बदल गए हैं। हमारी परवरिश ही हमें कहीं न कहीं दुर्बल बनाती है-

कितना भी किनारे रख दूं

इन बाड़ों को,

ये सामने आ ही जाते है

एक औरत होने के मायने

इन बाड़ों को किसी न किसी तरह स्वीकार करो ।

बचपन से लेकर मौत तक

ये सुरक्षा के बाड़े हमारा साथ देते हैं

इन बाड़ों की शर्तें भी होती हैं

जिन पर चलना एक औरत का नसीब है।

इन बाड़ों ने हम औरतों को अबला बना दिया!

अपनी कोख से विश्व को जन्म देने वाली

आज हर रूप में लहूलुहान है,

चाहे वह मां , बहन , या भार्या हों

सब इन बाड़ों की चक्की में पिसती ही हैं।

जितना ज्यादा उड़ लो आना है तुम्हें इन बाड़ों के अंदर।

सीता ने एक बार लांघी थी बाड़े की लकीर

पूरा इतिहास ही बदल गया,

अग्नि में झुलसकर धरती में समाना पड़ा।

आसान नहीं इन बाड़ों से निकलना

बाड़ों की सुविधाएं बाड़ों तक लाती हैं।

खुशी से हम भी इनके आदी हो चलें।

बाप ,भाई ,पिता , पुत्र चार बाड़े

हमें जन्म से मिले हैं।

इन्हें छोड़ा तो कुलनाशिनी , कुलटा जैसे नाम मिलेंगे

इनके फरमानों को अपनाना ही नियति हमारी।


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2 विचार “एक औरत होने के मायने&rdquo पर;

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