रिश्तों की शर्तें

रिश्तों की थी कुछ ऐसी शर्तें

जिनको हम अपना न सके ।

गैरों को भी बनते देखा दोस्त

हम अपनों से भी निभा ना सके ।

आंसू बहा लिये, जी हल्का हो गया

गम को फिर भी भुला ना सके ।

वक्त ने तराशा, ढल गए हम

दाग चेहरे से अपने मिटा ना सके ।

लिखा कुछ, शायद बन गया कुछ

गीत अपने ही गा ना सके ।

कोशिश की लाखो ं, सहा कांटो को

चमन अपना महका न सके ।


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