हरियाली साड़ी ओढ़े मां धरती को मेरा नमन!

सावन में हर तरफ हरियाली ही नजर आती है। बारिश की बूंदें पेड़ों पर गिरते हुए मुझे बहुत अच्छी लगती हैं। हवा के झोंको के साथ हिलते-डुलते ये वृक्ष और उनसे फूटती स्वर लहरियां तथा बारिश के कारण कातर हो छांह और ठौर तलाशते पक्षी मुझे अत्यंत मनोरम लगते हैं। प्रकृति अनुपम सुन्दरी है। प्रतिपल प्रतिक्षण जो नवीन है कला प्रेमी उसे ही सुन्दर कहते हैं। प्रकृति बिना भेदभाव के सबको सुख देती है। हवा की लहरियों पर हिलते-डुलते वृक्ष मुझे बहुत आकर्षक लगते हैं। कुछ पंक्तियां उन पर लिख रहीं हूं-

थिरकते हैं द्रुम हवा के ताल पर

विहवल होकर ,

प्रत्येक डाली ,वल्लरी नाच रही

कितनी रोमांचक है यह थिरकन!

मृदुल अंग डोल रहे नर्तक से

भाव-भंगिमा भी अनुपम

नशे में धुत बावले हो नाचते हैं पात सब

हवा के मल्हार , सावन या कजरी के राग सुर पर।

बहुत ही मनमोहक है यह नर्तन।

सावन अब भी आता है लेकिन कजरी और झूलों के बग़ैर।

इन पेड़ों की थिरकन मुझे बहुत भाती है।

Advertisements

14 thoughts on “हरियाली साड़ी ओढ़े मां धरती को मेरा नमन!

Add yours

  1. प्रणाम दीदी, बहुत सुंदर रचना किया है।मुझे बहुत खुशी है कि आप एक अच्छी कवित्री हैं।आपने गुरु जी एवं समस्त परिवार का मान,सम्मान, गौरव, संस्कृति को बढाया है। Regards of Summer-Field Public Junior High school, Padrauna

    Liked by 1 person

  2. सावन यानी हरियाली
    सावन यानी भोलेनाथ कि आराधना
    सावन यानी बारिश
    सावन यानी विल्वपत्र
    सावन यानी मोर का नृत्य
    सावन यानी खुशियाँ

    बहुत हि सुंदर ढंग से आपने सावन कि व्याख्या कि है।

    Liked by 1 person

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

Create a website or blog at WordPress.com

Up ↑

%d bloggers like this: