आप सभी को ईद की शुभकामनाएं। ईद के इस शुभ अवसर पर में आपके समक्ष श्री केदारनाथ जी की एक कविता प्रस्तुत करना चाहूंगी:

हम सब मिलकर ईद मनायें
सबकी उम्मीदों पर छायें
जग में ऐसे प्यार लुटायें
हम सब मिलकर ईद मनायें
नेक बनेंगे एक बनेंगे
भेद नहीं प्यार करेंगे
नाचें गायें धूम मचायें

हम सब मिलकर ईद मनायें
मीठी-मीठी सिवई खिलायें
सब अधरों पर खुशियाँ लायें
प्यार करो त्यौहार सिखायें
हम सब मिलकर ईद मनायें


हमको,
तुमको,
एक-दूसरे की बाहों में
बँध जाने की
ईद मुबारक।


बँधे-बँधे,
रह एक वृंत पर,
खोल-खोल कर प्रिय पंखुरियाँ
कमल-कमल-सा
खिल जाने की,
रूप-रंग से मुसकाने की
हमको,
तुमको
ईद मुबारक।


और
जगत के
इस जीवन के
खारे पानी के सागर में
खिले कमल की नाव चलाने,
हँसी-खुशी से
तर जाने की,
हमको,
तुमको
ईद मुबारक।


और
समर के
उन शूरों को
अनुबुझ ज्वाला की आशीषें,
बाहर बिजली की आशीषें
और हमारे दिल से निकली-
सूरज, चाँद,
सितारों वाली
हमदर्दी की प्यारी प्यारी
ईद मुबारक।


हमको,
तुमको
सब को अपनी
मीठी-मीठी
ईद-मुबारक।


Wish you a Happy Eid !

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7 Comments »

  1. इसे कुर्बानी का पर्व भी कहा जाता है…….पर इस्लामिक धार्मिक ग्रंथ में कही भी किसी जीव की कुर्बानी का जिक्र नहीं है। कुर्बानी का सही अर्थ है “अपने अह्म कि कुर्बानी, द्वेष कि कुर्बानी, स्वार्थ भाव कि कुर्बानी, अपने अंदर छुपे बुराई कि कुर्बानी” होता है। पर मनुष्य अपने जीभ के स्वाद के लिए कुर्बानी का गलत अर्थ निकाल के निर्जीव कि हत्या करता हैै।

    अल्लाह कि नज़र में तो सब एक समान है। जाहे वो बकरा हो, ऊँट हो, गाय हो, या इंसान हो। है तो सब उसी अल्लाह कि संतान ना। अल्लाह का संतान अगर अल्लाह के दुसरे संतान कि हत्या कर कुर्बानी का पर्व मनाएगा तो क्या अल्लाह खुश हो जाएगा!!!!!

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