खाली हाथ लौटाया गया हूं

यूं ही चलते चलते…….. कुछ हटकर :-

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मैं उनके दर से ठुकराया गया हूँ !
नसीहत देके बहकाया गया हूँ !!
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यहीं जन्नत सजा ली शेख़ जी ने !
मैं वादे पर ही बहलाया गया हूँ !!
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भले करती हों आंखें क़त्ल उनकी !
मगर मुजरिम मैं ठहराया गया हूँ !!
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लिखाया है रपट थाने में , शायद !
मैं उसके दिल में फिर पाया गया हूँ!!
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मेरी नाकामियों खुशियां मनाओ !
मैं खाली हांथ लौटाया गया हूँ !!
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—–Khursheed Alam ——–


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Categories: Uncategorized

8 replies

  1. क्या खूब लिखा है।बेहतरीन लिखा है।👌👌

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