स्वर्गीय अटल जी को उनके जन्मदिवस पर मेरा नमन..

अटल जी आपकी जयंती पर अपको मेरा नमन । आज आप के जैसे व्यक्तित्व की ही आवश्यकता है।आपके कथन और कविता को आपकी भावांजलि का माध्यम बना रहीं हूं-

“हार नहीं मानूंगा,रार नहीं ठानूंगा।

काल के कपाल पर लिखता हूं -मिटाता हूं,

गीत नया गाता हूं।”

“आदमी को चाहिए वह जूझे / परिस्थितियों से लड़ें

एक स्वप्न टूटे / तो दूसरा गढ़े।”

“दांव पर सब कुछ लगा , रूक नहीं सकते / टूट सकते हैं ,

मगर हम झुक नहीं सकते।”

“इससे फर्क नहीं पड़ता/कि आदमी कहां खड़ा है/

पथ पर या रथ पर/

तीर पर या प्राचीर पर /

फर्क इससे पड़ता है कि/

जहां खड़ा है/

या जहां उसे खड़ा होना पड़ा है/

उसका धरातल क्या है?”

” होना न होना एक ही सत्य के/

दो आयाम हैं ,शेष सब समझ का फेर है/

बुद्धि के व्यायाम हैं ।”

“जो जितना ऊंचा/

उतना ही एकाकी होता है,

हर भार वह स्वयं ही ढोता है।”

उपरोक्त पंक्तियों में उनका महिमा मंडित व्यक्तित्व झलक रहा है। उस महान राजनीतिज्ञ को बार-बार सहस्र बार प्रणाम 🙏🙏🙏🏵️🏵️🌹🌹

धन्यवाद आप सबका 🙏🙏

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5 thoughts on “स्वर्गीय अटल जी को उनके जन्मदिवस पर मेरा नमन..

  1. पूरे देश में क्रिसमस कि धूम है पर आपने अटल जी के शुभ जन्मदिवस पर हम सब के साथ कुछ साझा किया इसके लिए मैं आपका ह्रदय से धन्यवाद देता हूँ।
    आपके विचारों को पढ़ के मेरी आँखें भर आईं है और ह्रदय गद-गद हो गया है। अटल जी का आज शरीर हमारे बीच नहीं है पर उनका विचार हमारे साथ है। जो मानव मात्र के लिए एक प्रेरणा है।

    इसे हम सब तक साझा करनें के लिए आपका एक बार पुनः धन्यवाद🙏🙏

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