नरेन जागो फिर एक बार

आज स्वामी विवेकानंद जी का जन्म दिन है। उनका एक नाम नरेंद्र भी था। विवेक को यदि सदगुरु मिल जाए तो वह चिदानंदस्वरूप हो जाता है।

। अपनी एक कविता के माध्यम से मैं उन्हें श्रद्धांजलि दे रही हूं, मां भारती का प्रांगण ऐसे दिव्य प्रसूनो से सदैव सजा रहे। कहते हैं “एक गुणी पुत्र सहस्र मूर्ख पुत्रों से श्रेष्ठ होता है” (वरम एको गुणी पुत्र: न च मूर्ख शतान्यपि)।

नरेन जागो फिर एक बार !

भरो स्व ज्योति युवा उर में

हर लो काम तृषा विकार

दिव्यता इस मनु की फिर दो संवार ।

भारती के अमरपूत तुम

लहराया केसरिया निखिल विश्व में,

जीवन फूंका तुम ने धर्म सनातन में;

बोधि दिया पश्चिम को हिंदुत्व का ।

बोल उठी रोती भारती –

“मुझ उपेक्षित अबला को

नरेन तू ने कर दिया समृद्ध,

धन्य- धन्य मैं हुई,

न्यौछावर मैं तुम पर कोटि

सच्चे मेरी माटी के पूत तुम!”


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14 thoughts on “नरेन जागो फिर एक बार

  1. रचना मैडम आपकी कविता वाकई में एक सच्ची श्रद्धांजलि है। हर पंक्तियाँ भावनाओं से भरी हुईं है।

    मैं आपके साथ स्वामी जी कुछ बातें शेयर करना चाहता हूं
    भारतीय संस्कृति की गरिमा के रक्षक है विवेकानंद जी

    स्वामी विवेकानंद आज से 125 वर्ष पूर्व सन् 1893 में शिकागो में जब विश्वधर्म परिषद का आयोजन हुआ था ना तब भारत के धर्मप्रतिनिधि के रूप में स्वामी विवेकानंद वहाँ गये थे ।
    विश्वधर्म परिषदवाले मानते थे कि ‘ये तो भारत के कोई मामूली साधु हैं । इन्हें तो प्रवचन के लिए पाँच मिनट भी देंगे तो शायद कुछ बोल नहीं पायेंगे… उन्होंने स्वामी विवेकानंद के प्रति उपेक्षापूर्ण व्यवहार किया और उनका मखौल उड़ाते हुए कहा : ‘‘सब धर्मग्रंथों में आपका ग्रंथ सबसे नीचे है, अतः आप शून्य पर बोलें ।
    प्रवचन की शुरुआत में स्वामी विवेकानंद द्वारा किये गये उद्बोधन ‘मेरे प्यारे अमेरिका के भाइयों और बहनो !’ को सुनते ही श्रोताओं में इतना उल्लास छा गया कि दो मिनट तक तो तालियों की गड़गड़ाहट ही गूँजती रही ।
    तत्पश्चात् स्वामी विवेकानंद ने मानो सिंहगर्जना करते हुए कहा : ‘‘हमारा धर्मग्रंथ सबसे नीचे है । उसका अर्थ यह नहीं है कि वह सबसे छोटा है अपितु सबकी संस्कृति का मूलरूप, सब धर्मों का आधार हमारा धर्मग्रंथ ही है । यदि मैं उस धर्मग्रंथ को हटा लूँ तो आपके सभी ग्रंथ गिर जायेंगे ।

    भारतीय संस्कृति ही महान है तथा सर्व संस्कृतियों का आधार है।

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  2. To my regret, I had difficulty w/ this poem. I rely on Google to translate from Hindi to English and the translation is not always accurate. Can you, please, explain the poem’s meaning for those of us unfamiliar w/ Hindi, Rachana?

    Liked by 1 person

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