तारीखों का फैशन सा चल पड़ा है

जन्म से लेकर मृत्यु तक

हर क्षण का मूल्य हम चुकाते रहते हैं।

एक तारीख़ का अनुभव

क्या कभी दूसरे से मैच करता है?

कुछ तारीखों हमें मालामाल करती हैं,

वहीं कुछ कंगाल कर जाती हैं

कुछ का मलाल हम जीवन भर ढोते हैं।

तारीखों का चलन निभाते-निभाते

एक दिन हम भी तारीख़ बन जाते हैं।


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12 Comments »

  1. खुद को ना बांधो प्रियवर तुम इन तारिखो के इस जंजाल में,
    मत खो जाओ कल क्या हुआ,कल क्या होने वाला के विचार में।।

    सब तारीखे ना होगी समांतर, ना ही दिन बीते सारे एक से ,
    हरियाली आई थी तो पतजड़ का आना भी देखो।।

    हर तारीख में खुद से बेहतर करने की बस सीखो यारो,
    हर तारीख को मौका समझ,कुछ बेहतर कर जाओ यारो।।

    कुछ तारीखों के चलते , पृथ्वी के बोझ तले दब गए,
    कुछ उन्हीं तारीखों में मेहनत कर,सदा के लिए उत्कृष्ठ बन गए।।

    Bahut badhiya likha hai mam …idea badhiya tha👌👌👌😘 😍😍

    Liked by 3 people

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