हे मां भारती शत – शत नमन तुम्हें!

उर का हर स्पंदन करे नमन तुम्हें!

तेरी गोद मुझे हर जनम मिले

ओढूं तेरा बसंती बाना।

हे जगवंदिनी शत – शत नमन तुम्हें!

राग – द्वेष से परे नेह से भरे हुए

अपने पुत्रों को तूने सदा दुलारा।

हे तपसिंधुनी शत – शत नमन तुम्हें!

रसमयी तू, चिन्मयी तू, तू आनंदलोक

वीरों की, मनीषियों का आदिस्रोत।

हे वेदगायनिनी शत – शत नमन तुम्हें!


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