Category Archives: For Women

दर्पण

मैं हूं दर्पण तुम्हारा

दिखाती हूं प्रतिबिंब तुमको

भोग्या माना तो ब्रह्म से च्युत –

राक्षस बनोगे

आत्मा को पहचान मेरी

मर्यादित पुरुषोत्तम बनोगे ।

निर्णय तुम्हारा

मैं हूं दर्पण तुम्हारा ।


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काफी कुछ खोया है मैंने

काफी कुछ खोया है मैंने

अत्याचारों की भट्ठीमें

खुद को सतत झोंका है।

घर की सीमाएं लांघ

जीविका की तलाश में

कई बार शील, चीरहरण सहा।

किन्तु मन को न हारने दिया

गरिमा अपनी स्थापित करने में

सदियों संघर्ष किया है मैंने ।

बांध तोड़ मर्यादा की कभी उच्छृंखल बनी

घर बाहर को एक साथ समेटा है मैंने।

बेबस, असहाय ,अबला को

बहुत पीछे धकेला है मैंने।

लेकिन मन मसोसता है

जड़ मानसिकता से लड़ने में

ममत्व व दया को मार

मैं भी परुष बन गई।

शिशु सा जगत मैं सृष्टि

एकल वह मैं समष्टि ।

विकास की चकाचौंध में

रह न जाए अकेला ?