टिम – टिम करते तारे

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टिम – टिम करते तारे

मुझको बहुत सुहाते हैं

देख मां , हर रात ये मुझे अपने पास बुलाते हैं ।

मां बोली गुस्से से , ऐसा नहीं कहते हैं

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गौरैया

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अहे ! तुम कौन प्रिये ?

सुरभित बगिया की रखवार

रश्मियों से पूर्व जगती

करती अभिनंदन सूर्य का

जाने क्या कहती हो तुम

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फूल

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फूल खिलते हैं

जहां को महकाने के लिए

कितना सुंदर होता है खिलना

हंसी उनकी कुछ पल ही रहती है

समय उनकी सुंदरता ले लेता है

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स्मृतियां सावन की …….

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स्मृतियां सावन की . . . . .

काम आई पतझड़ में

हर व्यथा डाल से विलगने की

सहा हमने नए सृजन के लिए ।

मन हारा नहीं डाल का

पुरानी पत्तियां खाद बनेंगी

थोड़ा दर्द सहना होगा

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