Category Archives: Nature

टिम – टिम करते तारे

टिम – टिम करते तारे

मुझको बहुत सुहाते हैं

देख मां , हर रात ये मुझे अपने पास बुलाते हैं ।

मां बोली गुस्से से , ऐसा नहीं कहते हैं

लोग मर कर ही तारों के पास जाते हैं ।

हर कोई मर के तारा होता है

जैसे तू मुझे प्यारा है

वह भगवान को प्यारा होता है ।


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घनेरी छांव

कैसे कहूं मेरी तपती,

साखों पर आओ तुम,

छांव नहीं सिर्फ आशा की कोपलें फूटी हैं।

औरों की छाया में

गुजार लो दिन चार ।

कल जब कोपलें फूलों और पत्तों से लदकर

मजबूत दरख्त बन जाएं;

आ जाना तुम मेरी घनेरी छांव में

उस घनेरी छांव में फिर अपना नीड़ बनाना।।


थोड़ी देर

मां धरती थोड़े देर ही सही

मैं थक गई हूं

अपनी गोद में सुला लो ।

अपनी ममतालु हाथों से

थपकी दे मुझको

गा लोरी सुला दो ।

या फिर सुनाओ – वही कहानी

एक थी परियों की रानी

चंदा के घर में रहती थी ।

सपने में चंदा मामा के घर जाऊं

दूर टिम – टिम करते तारे

आहा ये सपने कितने प्यारे !

सपने आंखों को बहलाते

झूठे ही सही , टूटे मन को सहलाते ।

तो ले चलो ना फिर सपनों के गांव

यादों के पनघट पर;

अपने पीपल बरगद की –

शीतल छांव में

मां मुझे थोड़ी देर सुला लो ।


गौरैया

अहे ! तुम कौन प्रिये ?

सुरभित बगिया की रखवार

रश्मियों से पूर्व जगती

करती अभिनंदन सूर्य का

जाने क्या कहती हो तुम

शब्द तुम्हारे परे समझ के

किंतु रसमयी , अमृतमयी

सुरों की शीतलमंद बयार;

अनोखे चितेरे की मधुर कल्पना तुम !


बसंत – एक उपहार

प्रकृति के दूत,

फिर ले आए उपहार ;

बहुत छोटा उपहार पर गहरा प्यार।

नव किसलय मंजुल कलियां

नई शाखाएं सजी बेलों की ,

तरह-तरह की चहचहाहट –

मेरे खग कुल की ,

सब में रचा-बसा प्यार गहरा।।


फूल

फूल खिलते हैं

जहां को महकाने के लिए

कितना सुंदर होता है खिलना

हंसी उनकी कुछ पल ही रहती है

समय उनकी सुंदरता ले लेता है

हवा उनकी सुगंध ले लेती है।

भंवरे मधुमक्खियां पराग ले लेतें है।

कितने दुख सहता है फूल

पर नहीं छोड़ता हंसी का दामन ।

धूल में मिल कर भी वह बना रहता है ।


स्मृतियां सावन की …….

स्मृतियां सावन की . . . . .

काम आई पतझड़ में

हर व्यथा डाल से विलगने की

सहा हमने नए सृजन के लिए ।

मन हारा नहीं डाल का

पुरानी पत्तियां खाद बनेंगी

थोड़ा दर्द सहना होगा

पवन थपेड़ों में रहना होगा

अंदर आंसू लिए मन में

कुछ ऊर्जा सुलगाकर

उमंगों की उष्मा सहजाकर

धैर्य से रखा डाल ने

समय बदला उसका

आज उस ठूठ पर

कोपलें उगने लगीं।

सुख-दुख की

आंख मिचौली जीवन

विष पीकर ही

अमृत बनता शिवत्व ।।