मुझको एक बात बताना

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मुझको एक बात बताना

सच कहना, दिल से कहना

मुझे सुनना है तुम्हारा जवाब

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सूख रही स्याही कविता से

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कैसे बुनू बिंबों के जाल

कैसे खींचू शब्दों के छाल

मिथक ढूंढू क्यों अतीतगत

दंतकथा क्यों खोजू कालातीत।

क्या है यही कलेवर कविता का ?

यह जैसे माया रूप हो बनिता का

छल लेती है सभ्य जनों को

माया बंधन में बांध गई सबको।

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धर्म कहां है

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मैं पूछती हूं खुद से अक्सर

धर्म कहां है ?

पूजा , विविध व्रतों , उपवासों में

पुरोहित या धर्म गुरुओं के पास

नैष्ठिक अनुष्ठानों या कर्मकांडों में

उपासना के बिके हुए फूलों में

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